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नादानी

                
                                                         
                            उदासी लिखने पे एतराज़ करते हैं लोग,
                                                                 
                            
बे-वज़ह ख़ुद को नाराज़ करते हैं लोग।
आजकल गुनाहों को नादानी बता कर,
ख़ुद ही जुर्म का आगाज़ करते हैं लोग।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक वर्ष पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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