उदासी लिखने पे एतराज़ करते हैं लोग,
बे-वज़ह ख़ुद को नाराज़ करते हैं लोग।
आजकल गुनाहों को नादानी बता कर,
ख़ुद ही जुर्म का आगाज़ करते हैं लोग।
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