कृष्ण तुम खरे हो
सबके हृदय में अंदर तक भरे हो,
सारे अवतारों में अनूठे अवतार हो
सारी लीलाओं का सार हो,
सारी विधियों का विधान हो
समस्त दुष्टों का विनाश हो,
धर्म की आस हो
द्रौपदी की लाज हो,
पाँडवों की आन हो
भक्तों का मान हो,
सबसे बङे सन्त हो
आदि ना अंत हो,
कृष्ण तुम अनंत हो
कृष्ण तुम अनंत हो ।
-ममता सिंह देवा
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