इन बे-मुरव्वत,
गमों के चक्कर में,
हॅ॑सना मत भूल जाना।
काॅ॑टे बिछाते-बिछाते तुम,
ख़ुद के पाॅ॑व में,
चुभाते मत शूल जाना।
आंधी बनना,चाहें तूफाॅ॑ बनना,
नहीं दिल का पर खौफ बनना।
जो बन सको न आसमाॅ॑ किसी का
तो उड़ाते मत धूल जाना।
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