जैसे हर मोड़ पे नयी सड़क जुड़ जाती है,
ज़िंदगी रोज़ एक नया सबक सिखाती है।
हम ख़ुद ही बने रहते हैं लकीर के फ़कीर,
ज़िंदगी कब अपना खोया हक़ दोहराती है।
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