ना तो टूटता ना हीं बदनाम होता,
अगर हर रिश्ता यहाॅ॑ बेनाम होता।
कतराती न आंखें ख़्वाब देखने से,
दिल के हिस्से में भी आराम होता।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X