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गुलाब की तरह

                
                                                         
                            गुलाब की पंखुड़ियों सी, खिली हो तुम
                                                                 
                            
दिल की बगियन में ऐसे, मिली हो तुम
पतझड सी जीवन में,लायी तुम बहार
खुशबू सी बसने वाली दिल्लगी हो तुम

चांद की चांदनी की, शीतलता हो तुम
काव्य की शब्दों की ,सरलता हो तुम
खूबसूरती अपने में लिए,चमकती हो
खुशबू गुलाब का लिए,दिव्यता हो तुम


 
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एक वर्ष पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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