आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

हंसना अभी बाकी है

                
                                                         
                            वही मंजिल ,वही रास्ते,
                                                                 
                            
हम भी वही,पीड़ा लिए वही,
पर बदला जरूर कुछ है,
बदलना अभी भी बहुत कुछ है।

हंसना वहां अभी बाकी ही है,
कल जहां हम रोए थे,
और रोना अभी वहां बाकी है,
जहां हम हरदम हंसते है।

अभी बाते तो पूरी शेष है,
अभी नजरे वहां मिलानी है
जहां जहां झुका मेरा शीश है।

धुंधला सा हुआ जो थोड़ा मंजर है बस
मंजिल की चमक अभी भी वही है।
लिखना शेष ही शेष अभी है
करनी बड़ी भरपाई है।
-ममता मनु
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर