कुछ यूं करो कि जादू हो जाए,
हम तुम्हे भूल जिसके है उसके हो जाए,
कभी भावनाओं में आके यूं रुला जाते हो,
कभी क्रोध बनके चिड़चिड़ा बना जाते हो।
कुछ हमसे होता नहीं तो हम क्या करे,
कुछ तुम्ही ऐसा करो ,जिससे मुझे यकीन आ जाए कि तुम जिसके हो उसके हो चुके हो।
कभी ऐसे लगे कि तुम याद नहीं करते ,
जैसे हम करते है,ये महसूस तो करवाओ कि,
तुम भुला चुके हो।
हम कैसे भूल जाए जो बताया तक नहीं,
तुम जान क्यों नहीं पाए मुझे ,तुमसे तो कुछ छुपाया तक नहीं,
मै या तुम अब याद क्यों कर रहे ,
जो प्यार कभी निभाया तक नहीं।।।।।
-ममता मनु
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