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मां तेरे चरणों में अर्पण है

                
                                                         
                            वही सत्य की सरिता है, वही ममता का मधुमास है,
                                                                 
                            
हर कण-कण में रमी हुई, वह साँसों का विश्वास है।

उसकी गोद में सिमटा जग, गोद में ही विश्राम है,
माँ के कोमल चरणों में, चारों तीरथ धाम है।

वह स्नेह-सुधा की गागर है, जो निशि-दिन छलका करती है,
खुद अँधियारे में रहकर, घर में अंजोर भरती है।

ममता का अंचल फैलाकर, वह अंचल सा अडिग खड़ी,

दुनिया की हर बाधा से, वह माँ ही तो अकेली लड़ी।

वह वात्सल्य की वेदी है, वह त्याग का तर्पण है,

इस बेटी का कण-कण माँ, तेरे चरणों में अर्पण है।
- ममता यादव 
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3 महीने पहले

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