सीखा आदर देना तुमने,
मन भरा स्नेह भंडार,
तनिक नही है सुध भी अपनी,
क्यूँ करते हो इतना प्यार?
सब लोगों से किया किनारा
और दिया फिर मुझे सहारा,
मुझ बदबख़्त पर अदम्य विश्वास?
क्यूँ करते हो इतना प्यार?
सुख अपने सब देने को,
दुख मेरे सब लेने को,
सदा रहते हो तुम तैयार,
क्यूँ करते हो इतना प्यार?
कोई परेशानी जब घेरे मुझको
कैसे पता चलता है तुमको
पल नहीं गवांया पूछा हाल
क्यूँ करते हो इतना प्यार?
यूँ तो मेरे जीवन का हर क्षण
तेरे लिए मांगे आशीष
सदा रहो जीवन में तुम खुश
मुझे मिलता रहे तुम्हारा प्यार।।
- ममता खुराना
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X