आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

क्यूँ करते हो इतना प्यार?

                
                                                         
                            सीखा आदर देना तुमने,
                                                                 
                            
मन भरा स्नेह भंडार,
तनिक नही है सुध भी अपनी,
क्यूँ करते हो इतना प्यार?
सब लोगों से किया किनारा
और दिया फिर मुझे सहारा,
मुझ बदबख़्त पर अदम्य विश्वास?
क्यूँ करते हो इतना प्यार?
सुख अपने सब देने को,
दुख मेरे सब लेने को,
सदा रहते हो तुम तैयार,
क्यूँ करते हो इतना प्यार?
कोई परेशानी जब घेरे मुझको
कैसे पता चलता है तुमको
पल नहीं गवांया पूछा हाल
क्यूँ करते हो इतना प्यार?
यूँ तो मेरे जीवन का हर क्षण
तेरे लिए मांगे आशीष
सदा रहो जीवन में तुम खुश
मुझे मिलता रहे तुम्हारा प्यार।।

- ममता खुराना
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर