ज़रूरी नहीं कि हर किसी को रास आए हम
कुछ सोच कर खुदा इस जहाँ में लाया होगा
ना उतर पाए हर किसी की उम्मीदों पे खरे तो क्या...
खोटे सिक्कों में भी तो किसी ने खोट मिलाया होगा
ज़िंदगी तो बसर हो रही थी ख़ूब इत्मीनान से
ज़रूर ख्वाहिशों के समंदर में कोई उफ़ान आया होगा l
-ममता ग्रोवर
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