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दिल की बगिया

                
                                                         
                            मन की बगिया में
                                                                 
                            
कुछ फूल खिलते हैं ,
फिर ढेरों फूल ...
सतरंगी फूल ,
बगिया और भी
महक उठती हैl

बिना किसी निमंत्रण के
ढेर सारी तितलियाँ भी,
फिर इस मनोरम वातावरण में ,,,,
अपने -अपने दो जोड़ी
पंखों पर रंग- बिरंगी
रौनक लादे आ बिराजती हैं ,
और तो और.. बिना कोई
पेशगी या मेहनताना लिए
जुगनू भी खुद- बखुद चले आते हैं ,
इस बगिया के अंधियारे
छोरों का तम हरने...

फिर....
पता नहीं ... अचानक
उस बगिया के अद्भुत उजाले में ,
कुछ खर -पात उगते नज़र आते हैं ,
नज़र आते ही, इतनी तीव्रता से
अपना कद खींचते हैं कि
सब फूल मुरझाने लगते हैं ,
नहीं तो ढक लिए जाते हैं ,
फिर तितलियाँ भी गुम
हो जाती है और ...
जुगनुओं का भी कोई अता- पता नहीं l


और बगिया फिर, करे भी तो क्या करे
खारे पानी को बह जाने देती है और
बची- खुची उम्मीद देती ,कुछ जड़ों में
हिम्मत से शुद्ध सिंचन कर
जी-तोड़ कोशिश करती है ,.
पुनः खुद को
हरा भरा बनाने की ...
फूलों से सजाने की...
ताकि आमंत्रित कर सके
तितलियों और जुगनुओं को
फिर से......




 
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6 महीने पहले

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