लोग कहें प्रेम में क्या पाया ,राधा मिला ना मन का मीत
चैन मिला ना ही सुख पाया, रीता रीता गया जीवन बीत
राधा मुस्काई, पलकें उठाई, मन में धर धीरज यूँ बोली,
जिस मन ने प्रेमजोत जगाई,भरी उसकी रतनों से झोली,
देख बादल, होकर पागल, मोर नाचा, चकोर रहा प्यासा,
कोयल ने गाया ,प्रेम जिसने पाया , हार में उसकी जीत
-ममता प्रवीण
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