इस युग में वो रहती है
जहा न द्रोपदी ना
वो सीता बनकर सब कुछ सहती है
उस पर घर से लेकर दुनिया दारी की लाखो
जिम्मेदारी है ,
वो किसी से कम नही
क्योंकि वो आज की नारी है
जो सही लगता है
बेझिजक वो करती है
वक्त आने पर अपने हक के लिए
वो शेरनी के तरह लड़ती है
ना वो अबला ,न ही वो कोई
बेचारी है,
वो तो बस आज
की नारी है
जिस पर टिकी ये दुनिया सारी है।
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