सवेरा ढूंढने चला था मैं
अंधेरे में जा गिरा
बहुत देर से
भटक रहा हु इस अंधेरे में
अब डर लगता है
कही फस न जाऊं इस घेरे में
इंतजार किया मैंने बहुत कोई तो
आए जो हाथ दे
यहां से निकलने में मेरा कोई तो जो मेरा साथ दे
सबने सुनी चीखे मेरी
पर कोई सामने न आया
थक हार के मैने इस अंधेरे को ही
अपना घर बनाया
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