कल जो साथ थे
मेरे ....
आज अकेला पाया खुद को
पता था की ये होगा
फिर भी इस कगार मैं
लाया खुद को
गलती न थी मेरी
फिर भी उस पर
पछतावा होता है
नही पता जाने कहा मेरे मन
अक्सर खोता है
शब्दो के जाल में
फसते ही बहुत दर्द होता है
दिन बीतते जाते है
पता नही फिर इतना
दिल क्यू रोता है।
मेहफिलो में तो मैं
लाया खुद को
ये सोचकर की कोई साथ होगा
पर पता चला
कल जो साथ थे मेरे
आज अकेला पाया खुद को
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