डूब गई थोड़ा सा खुद में
ना पता चला
की वक्त कब फिसल गया
खबर न रही मुझे इतनी की
कब कितना कौन मुझसे आगे
निकल गया
गहरा समंदर है जिसमे
जहा बस अंधेरा लगता है
वो अंधेरा जाने क्यों मुझे
सवेरा लगता है
डूब गई थोड़ा सा खुद में
मैंने खुद को डूबने से बहुत
बचाया
लेकिन मैं न थी वो
जो वहा से खुद को उस जगह से वापस लाया
डूब गई थोड़ा सा खुद में
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