तनावों को लेकर
यहाँ-वहाँ जाता हूँ,
जैसे सड़क जाती है
दुर्घटनाओं को लेकर,
पृथ्वी घूमती है
भूकम्पों को लेकर,
ब्रह्मांड लिये रहता है
विस्फोटक जीवन,
इस सब के मध्य शान्ति से
पैदा होता है,
शिखर पुरुष
एक मनुष्य धीरे-धीरे।
- महेश रौतेला
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