आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

दे दे स्वर वीणावादिनी

                
                                                         
                            दे दे स्वर वीणावादिनी दे दे
                                                                 
                            
भारत की भाषा, भारत में कर दे,
जन-जन के मन में भर दे
स्वच्छ-स्वस्थ राष्ट्र को कर दे।
सहस्र युगों को हमें दिखा दे
वीणा के स्वर सर्वत्र बहा दे,
पग-पग पवित्र पुष्प बिछा दे
जिह्वा से मधु रस बरसा दे।
संग प्यार का प्यारा दे दे
उच्च शिखर की खुशियां दे दे,
स्वच्छ-स्वतंत्र गरिमा दे दे
भारत की भाषा, भारत में रख दे।
रुग्ण मन को शौर्य सुना दे
शुष्क सुरों में प्राण जगा दे,
भारत से प्रिय बातें कर दे
भारत की बातें, भारत में भर दे।
-महेश रौतेला
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
58 मिनट पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर