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क्यों दें मौका दुनियां को करने का प्रतिवाद।।

                
                                                         
                            रो रो कर थक गए तेरे जाने के बाद।
                                                                 
                            
कैसे निकालें टूटे हुए दिल से तेरी याद।।

उजड़ गई दुनियां मेरी हिल गई बुनियाद।।
एक तू ही था जिसके साथ होता था संवाद।।

है इल्तिज़ा खुदा से मेरी रहे हर हाल में तू आबाद।
क्या बुरा है मैं अगर होता हूं तो हो जाऊं बर्बाद।।

अच्छा है न हो दोनों के बीच अब कोई अनुवाद।
क्यों दें मौका दुनियां को करने का प्रतिवाद।।

मुद्दतों के बाद हुई महेश की कलम नाशाद।
अश्क़ बहे और नहीं हुई पूरी कोई मुराद।।
- महेश कुमार
 
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एक घंटा पहले

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