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घर से दूर

                
                                                         
                            घर छोड़ना एक मजबूरी है
                                                                 
                            
वरना अपने बहुत जरूरी है

माया तो आनी-जानी है
बीता वक़्त एक कहानी है
हँसता-खिलता परिवार पले
ये जिम्मेदारी हमें निभानी है।

घर छोड़ना एक मजबूरी है
वरना अपने बहुत जरूरी है

बच्चपन में मैं खूब खेला
माँ-बाप ने हर दुख झेला
उनके बुढ़ापे से मेरी ज़वानी
दूँगा हँस कर ये क़ुरबानी।

घर छोड़ना एक मजबूरी है
वरना अपने बहुत जरूरी है
M K Yadav




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7 वर्ष पहले

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