घर छोड़ना एक मजबूरी है
वरना अपने बहुत जरूरी है
माया तो आनी-जानी है
बीता वक़्त एक कहानी है
हँसता-खिलता परिवार पले
ये जिम्मेदारी हमें निभानी है।
घर छोड़ना एक मजबूरी है
वरना अपने बहुत जरूरी है
बच्चपन में मैं खूब खेला
माँ-बाप ने हर दुख झेला
उनके बुढ़ापे से मेरी ज़वानी
दूँगा हँस कर ये क़ुरबानी।
घर छोड़ना एक मजबूरी है
वरना अपने बहुत जरूरी है
M K Yadav
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