करवाचौथ और मेरा चांद
मुझे चांद समझ मेरा चांद कहा,
मुझे चांद देखकर आना है।
छलनी में जितने छिद्र हैं,
उतने जन्म तुझे ही पाना है।
तू चाहे जैसा अब रख मुझे,
तेरे चरणों में मैं अर्पित हूं।
स्वर्ग - नरक है तेरे हाथों में,
मैं जीवन भर तुझे समर्पित हूं।
प्रीति - कलह का है जीवन,
इसे सुखद हमें ही बनाना है।
ज्यों चांद-चांदनी का मधुर मिलन,
हमें जीवन में इसे समाना है।
मुझे राधा बनकर रहना है,
तुझे कृष्ण बना कर रखना है।
यहां चाहत तेरी कुछ भी हो,
हर जन्म तेरी ही राह तकना है।
अर्घ्य दे रही हूं मैं तुझे चांद,
उम्र मेरे चांद को लग जाए।
वह जिए हजारों साल यहां,
पहले मेरा ही जनाजा सज जाए।
-महेश तंवर
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