आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

हर जन्म तेरी ही राह तकना है।

                
                                                         
                            करवाचौथ और मेरा चांद
                                                                 
                            

मुझे चांद समझ मेरा चांद कहा,
मुझे चांद देखकर आना है।
छलनी में जितने छिद्र हैं,
उतने जन्म तुझे ही पाना है।

तू चाहे जैसा अब रख मुझे,
तेरे चरणों में मैं अर्पित हूं।
स्वर्ग - नरक है तेरे हाथों में,
मैं जीवन भर तुझे समर्पित हूं।

प्रीति - कलह का है जीवन,
इसे सुखद हमें ही बनाना है।
ज्यों चांद-चांदनी का मधुर मिलन,
हमें जीवन में इसे समाना है।

मुझे राधा बनकर रहना है,
तुझे कृष्ण बना कर रखना है।
यहां चाहत तेरी कुछ भी हो,
हर जन्म तेरी ही राह तकना है।

अर्घ्य दे रही हूं मैं तुझे चांद,
उम्र मेरे चांद को लग जाए।
वह जिए हजारों साल यहां,
पहले मेरा ही जनाजा सज जाए।
-महेश तंवर
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
5 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर