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एनकाउंटर

                
                                                         
                            एनकाउंटर
                                                                 
                            

पहले सूर्या अब साई,
सूनी गोद कर गए मांँ की।
क्या कसूर था इन बच्चों का,
दरिंदो ने इनकी सांसे छीनी।

पुलिस प्रशासन अखियांँ मुंदे,
न्याय के लिए मांँ-बाप दर-दर घूमे।
कौन सुनेगा पुकार इनकी,
जनता भी एनकाउंटर मांगे।

जब तक ना सजा पाते कातिल,
हौसले औरों के बुलंद रहेंगे।
धिक्कार है उन माता-पिता का,
जिनका बच्चों पर कंट्रोल नहीं।

आवारगी दरिंदगी करते वो,
इनके हत्थे चढ़ते निर्दोष कईं।
एनकाउंटर उनका तो होना चाहिए,
जो औरों की छीन लेते हैं खुशी।

खून का बदला खून ही हो अब तो,
तभी ऐसे मांँ-बाप की आंँखें खुलती है,
बात तुम्हें बतलाता हूँ सच्ची,
आज मेरे, कल तुम्हारें बच्चों की बारी हैं।

 
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2 महीने पहले

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