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सोने को जिंदगी कोई बिछौना देदे

                
                                                         
                            सोने को जिंदगी कोई बिछौना दे दे।
                                                                 
                            
अपने तु खंडर का कोई भि कोना दे दे।।

थका हूं सो जाऊंगा कहीं भि जिंदगी।
जुल्म यह भी सह जाऊंगा मेरी जिंदगी।।
बेबसी को मेरी कोई ठिकाना दे दे।
अपने तु खंडर का कोई भिकोना दे दे।।

न आरजू है न तमन्ना फिर फिकर कैसी।
न सफर है न मंजिल कोई फिर डगर कैसी।।
टूटे न मेरी तरह कोई खिलौना दे दे।
अपने तू खंडार का कोई भी कोना दे दे।।

जाने क्यूं ये किस्मत खेल ऐसे खेलती।
देने से पहले गम मजबूरी न देखती।।
मेरी उम्मीद को कोई बहाना दे दे।
अपने तु खंडर का कोई भि कोना दे दे।।
सोने को जिंदगी कोई बिछौना दे दे।
- एम एस बघेल
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एक वर्ष पहले

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