क्लोन भले जग में बन जाए,
आए चाहे कोई जमाना।
लेकिन मानव से जीवों का,
रिश्ता आखिर बहुत पुराना।।
मौसम का अधिकारी बन जो,
भूल जाए वह पेड़ उगाना।
लेकिन पेड़ों से तो उसका,
रिश्ता आखिर बहुत पुराना।।
भले आधुनिक श्रोतों से वह,
नीर प्राप्त कर ले मनमाना।
लेकिन बादल, नदी, सिंधु से,
उसका रिश्ता बहुत पुराना।।
भले कृत्रिम वायु को चाहे,
अपनी उंगली पर नचवाना।
लेकिन बहती मस्त पवन से,
उसका रिश्ता बहुत पुराना।।
भले ठंड में गरमी पाकर,
गाए वह विद्धुत का गाना।
लेकिन सूर्य, चंद्र, तारों से,
उसका रिश्ता बहुत पुराना।।
ये रिश्ते कहते है मानव,
कितने भी ऊँचे उठ जाना।
लेकिन खोकर दंभ, स्वार्थ में,
निज प्रकृति भूल न जाना।।
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