तोता है खग चंचल सुंदर,
मानव ने यह देख लिया।
चंचल करतब, मीठी बोली,
मन मानव का मुग्ध हुआ।।
इसको पालूँ, पास रखूं मैं,
मन में उसने ठान लिया।
गया वनों की हरियाली में,
जाल वहाँ पर विछा दिया।।
तोता आया फंसा जाल में,
मानव ने जा पकड़ लिया।
लाया उसको अपने संग वह,
फिर पिंजरे में कैद किया।।
फल और मिर्च दिये खाने को,
दिया नाम फिर प्यार दिया।
इतना सब कुछ दिया किंतु हक,
आजादी का छीन लिया।।
तोता रोता रहा दिनों तक,
फिर यह सब स्वीकार किया।
पर चहचहाना, गीत सुनाना,
चंचल करतब भुला दिया।।
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