मैं लवकुश सरल स्वाभिमानी
शब्दों का जादूगर, कविता का दीवानी।
श्रृंगार में मधुरता, वीर में तूफानी,
मैं लवकुश, सरल स्वाभिमानी।
भावों से खेलूं, शब्दों को साधूं,
हर पंक्ति में जीवन का रंग डालूं।
मंच पर गूंजे मेरे स्वर का तराना,
दिल छू ले हर श्रोता का अफसाना।
श्रृंगार में प्रेम की मिठास लिए,
वीर रस में साहस का एहसास दिए।
मैं शब्दों से खींचूं मन के चित्र,
हर कविता में हो नई उमंग का चित्र।
साधारण हूँ, पर सपने हैं बड़े,
कविता के संग चलूँ हर मोड़ पर खड़े।
मैं लवकुश, शब्दों का बुनकर,
काव्य से रचूँ जीवन का सुंदर सफर।
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