तेरी आँखों के सागर में उतरने का इरादा है,
तुझी से इश्क़ करने का मुकम्मल आज वादा है।
गुलाबी धूप जैसी खिल उठी जब चाँदनी तेरी,
मेरे वीरान दिल को मिल गई ताबीर फिर मेरी,
सँवरती ज़ुल्फ़ की छाँव में जीने का इरादा है,
तुझी से इश्क़ करने का मुकम्मल आज वादा है।
खनकती चूड़ियों की धुन पिरोती हर तराने में,
कहाँ ऐसा हसीं मंज़र मिलेगा इस ज़माने में,
तेरी पायल की छम-छम में बहकने का इरादा है,
तुझी से इश्क़ करने का मुकम्मल आज वादा है।
हया से लाल गालों पर जो बिखरी इक हँसी तेरी,
चुरा कर होश ले जाती अदा वो सादगी तेरी,
इन्हीं मदहोश साँसों में सिमटने का इरादा है,
तुझी से इश्क़ करने का मुकम्मल आज वादा है।
न कोई आरज़ू बाक़ी, न कोई ख़्वाब दूजा है,
तुझे तकते हुए जीना मुहब्बत की ही पूजा है,
उम्र भर साथ तेरे ही ठहरने का इरादा है,
तुझी से इश्क़ करने का लवकुश का आज वादा है।
- लवकुश अवस्थी
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