आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

"कृष्णा का आवाहन "

                
                                                         
                            मेरे कृष्णा तुम
                                                                 
                            
छुपे हो कहाँ
मेरे कृष्णा तुम
छुपे हो कहाँ ?
देखो दास तुम्हारा
तड़पे यहाँ
मेरे कृष्णा तुम
छुपे हो कहाँ ,......

तुमने ही तण्डुल चुपके से ,
खाए सुदामा के घर की !
पल में ही तुमने काया पलट ,
दी सुदामा के घर की !!
तुमने ही तण्डुल चुपके से ,
खाए सुदामा के घर की !
पल में ही तुमने काया पलट ,
दी सुदामा के घर की !!

जान गया तुझे
जान गया
सारा जहाँ !
मेरे कृष्णा तुम
छुपे हो कहाँ
मेरे कृष्णा तुम
छुपे हो कहाँ ?
देखो दास तुम्हारा
तड़पे यहाँ
मेरे कृष्णा तुम
छुपे हो कहाँ ,......


तुमने ही अपने चिर बढ़ाये ,
नारी को तुम बचाये !
नारी की गरिमा को तुमने ,
ही हमको पाठ पढ़ाये !!
तुमने ही अपने चिर बढ़ाये ,
नारी को तुम बचाये !
नारी की गरिमा को तुमने ,
ही हमको पाठ पढ़ाये !!

देख लिया
तुझे देख लिया
सारा जहाँ !
मेरे कृष्णा तुम
छुपे हो कहाँ
मेरे कृष्णा तुम
छुपे हो कहाँ ?
देखो दास तुम्हारा
तड़पे यहाँ
मेरे कृष्णा तुम
छुपे हो कहाँ ,......

सारथी बनके तुमने ही युद्ध ,
की नीति बताई !
अपनी कौशलता के बल पर ,
उनको जीत दिलाई !!
सारथी बनके तुमने ही युद्ध ,
की नीति बताई !
अपनी कौशलता के बल पर ,
उनको जीत दिलाई !!

मान गया तुझे
मान गया
सारा जहाँ !
मेरे कृष्णा तुम
छुपे हो कहाँ
मेरे कृष्णा तुम
छुपे हो कहाँ ?
देखो दास तुम्हारा
तड़पे यहाँ
मेरे कृष्णा तुम
छुपे हो कहाँ ,......


 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
48 minutes ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर