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प्रकृति के आगे हमें

                
                                                         
                            प्रकृति के आगे हमें,
                                                                 
                            
घुटना टेकना पड़ता है,
विज्ञान टेक्नोलॉजी,
चिकित्सक मेडिसिन,
सभी बौने हो जाते हैं,
परमात्मा के आगे।
नहीं चलता है किसी का बस,
जब होती है बेमौसम बरसात,
अचानक आती है नदियों में बाढ़,
गांव -शहर बह जाते हैं।
ठंडी में कोहरा रोक देता है,
सड़क के साथ हवाई मार्ग,
कड़कती है आसमान से बिजली,
ना जाने किसके कितने सपने,
हो जाते हैं चकनाचूर।
नहीं चलता है किसी का बस,
जब आती हैं महामारी,
बस्ती की बस्ती साफ हो जाती है।
-कुलदीप शुक्ला
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एक घंटा पहले

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