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शब्द बाण

                
                                                         
                            शब्दों से बन जाए कविता शब्दों से ही बन जाए गजल,
                                                                 
                            
गीत ऐसे बन जाएं जो नयन कर देते हैं सजल,

शब्दों से बढ़ जाएं झगड़े शब्दों से बढ़ जाता नेह,
आओ शब्दों से प्यास बुझा दें सदियों की ये प्यासी देह,

फुसफुसा कानों में दो चार शब्द निर्जीव देह को सजीव करो,
दिल में शब्दों से स्पंदन हो फिर तुम देह का आवाहन करो,

फूलों से ढक कर तुमने देह मेरी को तो दफन किया,
प्यासी रूह को भूल गए जिसे शब्द बाण  से था कत्ल किया,

फूलों से दबी देह से मुझे कई अहसास मिले,
रूह को लगा जैसे तुम आकर मेरे गले मिले....
 
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2 वर्ष पहले

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