आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

किसका रस्ता देखें अखियां

                
                                                         
                            किसका रस्ता देखें अखियां जो अब तक लौट के न आए,
                                                                 
                            
दिन में करूं इंतजार मैं तेरा और रात को नींद न आए,

एक तो मौसम बरसात का विरहनी के आघात का,
दूजी पूनम की रात चांदनी बैरन बदन में अगन लगाए,

बार बार मोहे सखियां छेड़ें क्यों सूज रही हैं तेरी अखियां,
हवा भी ठहर पूछ रही है कोई आहट है कब वो आए,

अरमान बहुत से प्यासे हैं बहुत से ख्वाब अधूरे हैं,
रोज बुनती हूं इनको बिन लफ्जों के पूरे न हो पाए,

कभी सुनो मेरे दिल की धड़कन जो तेरा ही नाम पुकारे,
किसका रस्ता देखें भूषण जो वायदा कर के न आए.
 
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर