किसका रस्ता देखें अखियां जो अब तक लौट के न आए,
दिन में करूं इंतजार मैं तेरा और रात को नींद न आए,
एक तो मौसम बरसात का विरहनी के आघात का,
दूजी पूनम की रात चांदनी बैरन बदन में अगन लगाए,
बार बार मोहे सखियां छेड़ें क्यों सूज रही हैं तेरी अखियां,
हवा भी ठहर पूछ रही है कोई आहट है कब वो आए,
अरमान बहुत से प्यासे हैं बहुत से ख्वाब अधूरे हैं,
रोज बुनती हूं इनको बिन लफ्जों के पूरे न हो पाए,
कभी सुनो मेरे दिल की धड़कन जो तेरा ही नाम पुकारे,
किसका रस्ता देखें भूषण जो वायदा कर के न आए.
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