फूल से भी नाजुक हाथों में लेकर एक फूल,
मन ही मन में सोच कर मुस्काती जैसे फूल,
उपवन की राहों में मन में उमड़े नया तराना,
इसकी महक में खोकर जाती हूँ सब ग़म भूल,
फूलों की महक सबको है अपने पास बुलाए,
रंग बिरंगी इक बस्ती ये लगते हैं नाजुक फूल,
फूलों की महक कांटों की चुभन दें जीवन संदेश
इंसान काट कर उपवन को क्यों जाता है भूल,
हंसते फूलों को देखकर हंसते है जख्म भी मेरे,
दुनिया की ठोकरें फिर पलभर में जाती हूं भूल,
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