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एक गजल - तेरा इंतजार

                
                                                         
                            इंतजार में कई खत लिखे पर जवाब नहीं आया
                                                                 
                            
मेघों से भेजे कई संदेश कोई जवाब नहीं आया

साहिल पर रख कर उम्मीद हर मौज से पूछा,
तेरे शहर से आती हवाओं से कोई ख्वाब नहीं आया,

हर ख़त में दर्द ए बयां में इक ग़ज़ल लिख डाली
अभी तलक  कोई इजहार ए पयाम नहीं आया,

हर लफ़्ज़ में तेरा जिक्र हर सफ़े पे तेरा ही नाम
बेशुमार भेजे ख़त तुझे तेरा कोई पैगाम न आया

कहां तक करूं इंतजार मैं तेरा ख्वाबों के सहारे
हकीकत में मन माफिक कोई शख़्स नहीं आया

 
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एक वर्ष पहले

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