बड़ी तमन्ना थी उनसे राब्ता हो इक बार,
जो बात अधूरी रह गई पूरी करेंगे आज,
वो आए दुआ सलाम हुई करनी चाही बात,
न जी भर के देखा न कर सके कोई बात,
वो तो उठ कर चल दिए बिना किए कोई बात,
मन की मन में रह गई अधूरी रही मुलाकात....
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X