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मैं तेरा पिंजरा नहीं, तेरे पंख बनना चाहता हूं

                
                                                         
                            मैं तेरा पिंजरा नहीं,
                                                                 
                            
तेरे पंख बनना चाहता हूं।
नहीं चाहता तेरा हाथ थामना,
तुझे आज़ाद देखना चाहता हूं।
नापे तू जिसे पहन दुनियां जहां की सड़कों को,
मैं तेरा वो मज़बूत जूता बनना चाहता हूं।
तेरे चेहरे पर दिखे जो हमेशा खिलती,
मैं वो हंसी बनना चाहता हूं।
बारिश और धूप में कहीं रुक न जाए तू,
मैं तो तेरा छाता बनना चाहता हूं।
अंधेरे में भी किसी छोटे बल्ब जैसा,
मैं तेरा उजाला बनना चाहता हूं।
उड़ते उड़ते गर कभी थक जाए तू,
मैं तेरे आराम का शजर बनना चाहता हूं।
जिसको देख कर संवारे तू अपनी ज़ुल्फ़ें,
मैं तो वो आईना बनना चाहता हूं।
वक़्त कहां है मिलता इस ज़माने में,
मैं तेरा वक़्त बनना चाहता हूं।
और अगर यह सब भी लगे तुझे ज़्यादा,
तो मैं तेरी ख़ुशी के लिए तुझे छोड़ देना चाहता हूं।
मैं तेरा पिंजरा नहीं,
तेरे पंख बनना चाहता हूं।
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एक वर्ष पहले

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