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हुऐ मगरूर हम इस तरह

                
                                                         
                            हुऐ मगरूर हम इस तरह
                                                                 
                            

हुऐ मगरूर हम इस तरह
कि खो गये अपने ही बयान में
याद करते हम किसी को कहां
हम भूल गए अपने ही संज्ञान में
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 hours ago

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