आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

बाबा संगत सिंह का शौर्य

                
                                                         
                            माता बीबी अमारों की कोख से जन्म लिया सूरत घणी प्यारी,
                                                                 
                            
शास्त्र विद्या में निपुण और युद्धकला में तो बात घणी निराली|

पिता भाई रानिया ने देश की रक्षा खातिर गुरु की शरण में भेज दिया,
गुरु गोविंद ने युद्ध कला में उनका देख पराक्रम फ़ौज कमांडर बना दिया|

उनकी अगुवाई में सिख फौज ने की चढ़ाई भगानी के रण को जीत लिया,
अपने शौर्य पराक्रम का परिचय देते हुए भीमचंद्र को पराधीन किया|

दस युद्ध लड़े थे जिसने कभी ना रण में हारा ,
रण के मैदान में जो भी उसके सामने आया उसने बीच से फाड़ डाला|

रण हो या मैदान उसने अपना ही झंडा लहराया,
इसी वीरता के कारण वीर सुरमा महान रविदासी कहलाया|

अंतिम युद्ध था चमकौर जिसमें मुगलों और राजपूतों की 10 लाख की फ़ौज से पड़ा पाला,
उसने अपने गुरु और धर्म की खातिर पहन कलंगी अपना बलिदान दे डाला|
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर