इस जगती तल की हर नारी के नमन में वंदन में आदर में मेरा सर झुका हुआ
पर देख हाल जग का उन सबसे एक कटु प्रश्न मेरा सादर
सबसे बना हुआ
कि मां की शक्ति के बिना इस जग में जीवन तो संभव नही हुआ
जो भी इस सकल सृष्टि में गोचर है वो मां से ही तो हैं उत्पन्न
हुआ
अगर हर मां के किरदार में सच्चाई, सभयता और त्याग की मिसालें है
तो फिर उनकी सी संतति से भरा ये समाज आखिर कैसे असभ्य हुआ
चीरहरण, हत्या, घोटाले, बेसक किसी मां ने तो नही सिखाया होगा
फिर बताओ कोई ये सारे दुर्गुण से कैसे ये जग जीवन व्याप्त हुआ
मातृ दिवस में भारी संख्या में सोशल मीडिया पर मां के लिए प्रेम है संवेदना है
तो फिर वो किसकी मां है,वृद्धाश्रम के दरवाजे पर जिनका चेहरा दिखता रोता हुआ
कभी सोच कर जरूर देखना क्या सचमुच कमी आपके संस्कारों में हुई है
या फिर इनके ऐसे होने में ममता की जंजीर आपके मोह का बंधन उत्तरदायी हुआ
आप सभी माताओं से मेरा करबद्ध एक विनम्र अनुग्रह है कि
आप सख्त हो
कदम लड़खड़ाए तो सहारा दो पर उस वक्त नजर फेर लो जब देखो कुसंग में पड़ा हुआ
गर आज वो औरों को दुख देने पर आपसे मारे धिक्कारे नहीं जायेगे
तो जो खंजर आज दूसरो के लिए है कल वो मिलेगा आपके हलक में उतरा हुआ
आप में जनन की सृजन की शक्ति है आप विभूतियों का निर्माण करो
बन जेवंता जीजाबाई समाज को शिवाजी, वीर प्रताप दो ना कि जनसंख्या विस्तार करो
आपको कैसे चरित्र के इंसान की मां बनना है अब ये आप पर निर्भर करता है
क्यूंकि मां से ध्रुव प्रहलाद बने मां से ही हिरण्यकशिपु हिरण्याक्ष हुआ
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