हम भी चांद से क्या क्या रिश्ते बना बैठे है
छोटे थे बचपन में हमारा मामा था चांद
बड़े हुए महबूब चाहिए चांद जैसी
शादी हुई तो मां को बहू चाहिए चांद जैसी
हुई पैदा किलकारी घर में बेटी चाहिए चांद जैसी
जिम्मेदारी आई कंधों पर सीरत चाहिए चांद जैसी
तमाचा मारा वक्त ने तो बुढ़ापा चाहिए चांद जैसा
आई मौत सामने तो "खुशी" चाहिए चांद जैसी
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