अपनी खुशी की बिना चिंता किए,
आपकी हर खुशी में, वो खुश हो जाए।
आपके दुखी होने पर, वो आंसू बहाएं,
उसके हर आंसू में, ममता दिख जाए।
तभी तो वो ' मां ' कहलाए ।
आपके खाना खाने से पहले, वो कभी ना खाए,
आपको अपने साथ बिठाकर, खुद खाएं और खिलाएं।
खाना न खाने की जिद पर, वो आंसू बहाएं,
हर वक्त ख्याल वो आपका रख पाएं।
तभी तो वो ' मां ' कहलाए।
आपके ना मानने पर वो समझाएं,
ना समझने पर, दो थप्पड़ लगाए।
उसकी हर चिंता से, आपका हित हो जाए,
उसकी हर प्रार्थना में, आप ही का नाम आए।
तभी तो वह ' मां ' कहलाएं।
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