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दुर्गा माई रे

                
                                                         
                            दुर्गा माई रे
                                                                 
                            

बैल की सवारी करके
आज मेरे घर में आई रे
शैलपुत्री है तू कहलाई रे
तेरी जय हो दुर्गा माई रे

कमल का आसन लगाया
रूप नया सा दिखलाया
ब्रह्मचारिणी तू कहलाई रे
तेरी जय हो दुर्गा माई रे

फिर सिंह को वाहन बनाया
करके शेर सवारी आई रे
चंद्रघंटा तू कहलाई रे
तेरी जय हो दुर्गा माई रे

तूने सृष्टि को है रचाया
अष्ट भुजा रूप दिखलाया
कुष्मांडा है तू कहलाई रे
तेरी जय हो दुर्गा माई रे

रूप एक नया दिखलाया
कार्तिक को गोद में बैठाया
स्कंदमाता तू कहलाई रे
तेरी जय हो दुर्गा माई रे

सिंह की सवारी बनाई
छम छम पायल छनकाई
कात्यायनी तू कहलाई रे
मेरी जय हो दुर्गा माई रे

गर्दभ पर बैठकर आई
नैनों से ज्वाला बरसायी
कालरात्रि तू कहलाई रे
मेरी जय हो दुर्गा माई रे

सुंदर रूप तू दिखलाई
वृषभ की सवारी कर आई
महागौरी तू कहलाई रे
तेरी जय हो दुर्गा माई रे

सिंह पे है चढ़के आई
खीर पूड़ी भोग लगाई
लाल चुनर ओढ़ कर आई
सिद्धिदात्री तू कहलाई रे

भक्तों ने जयकारा लगाया
जग जननी तुझे बुलाया
नवरात्रि की बेला आई रे
तेरी जय हो दुर्गा माई रे।।
-कविता चौहान
 
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3 घंटे पहले

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