किस्से और कहानी जैसी अपनी प्रीत लिखा है
टूटे मन को जोड़ - जोड़कर मैने गीत लिखा है
एक अजीब सा था शुरूर जो मेरे ऊपर आया
मैने बिल्कुल मान लिया कि वो है मेरी छाया
वो जो कह दे रात कहो तो दिन को रात बताता
अपने मन में छिपी हुई उसको हर बात बताता
जैसे - तैसे उससे मिलने एक - दो बार गया मैं
उसके नयनपाश में बंधकर खुद को हार गया मैं
उन आंखों के जादू से मेरा अल्हड़पन निखरा
मैने माना संवर रहा है , मेरा लहजा बिखरा
ह्रंदय समर्पित कर देने को अपनी जीत लिखा है
टूटे मन को जोड़ - जोड़कर मैने गीत लिखा है।
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