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एक लड़का

                
                                                         
                            रोता रोता जब एक लड़का, इस दुनिया में आया था,
                                                                 
                            
घर का चिराग कह, सबने खूब जश्न मनाया था;
अन्जान था वो आने वाली कठिनाइयों से,
वो Pressure और Depression जैसी बिमारियों से;
छोटी सी उम्र में ही, घर की जिम्मेदारियाँ उठाने लगा था,
अपने दुःख को अब वो सबसे छुपाने लगा था;
पैसे नहीं है जेब में, अब ये डर सताने लगा था,
घर छोड़कर कमाने अब, अपनों से दूर जा रहा था;
खुद को अकेले संभालना
जिंदगी की चुनौतियों से अकेले लड़ना,
गिरते-संभलते सीख रहा था
अपने परिवार को सुखी जीवन देने की चाह में,
वो खुद का ख्याल रखना ही भूल रहा था।
-धीरेन्द्र सिंह
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एक वर्ष पहले

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