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मय पैगाम

                
                                                         
                            मय पैगाम
                                                                 
                            
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यह आलय है मदिरालय है
धर्म नहीं है जाति नहीं है
ऊंच नीच का भेद नहीं है
मान सम्मान एक समान है ।।

ना पैगम्बर न ही पुजारी
ना पादरी है न आभारी
भेद भाव नींव नहीं है
ना इधर उधर बंटवारा है ।।

मदिरालय में आने वाला
मदिरालय से जाने वाला
सब मय मध की आली आला
मय ही मैं को कहने वाला ।।

ना मंदिर का पैगाम उठे
ना मस्ज़िद का फतवा ही चले
न धर्मान्तरण पादरी की
ऐसी कोई रीत बहेगी ।।
ऐसे ऐसे आलय खोलो
मंदिर मस्जिद जा जा बोलो
गुरुद्वारे गिरिजाघर में जा
मय पैगाम जा कर बोलो ।।


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8 वर्ष पहले

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