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मैं, मैं हूँ

                
                                                         
                            मैं किसी परिवार का दिया हुआ नाम नहीं,
                                                                 
                            
मैं किसी महान हस्ती के जैसा नहीं,
ना ही मैं किसी गिरे हुए किरदार जैसा,
मैं कोई अवतार नहीं, गण नहीं,
देवों का अंश नहीं,
कोई पितृ नहीं,
मैं केवल, मैं हूँ।
ना किसी से मिलता-जुलता,
ना किसी के जैसा,
और ना कोई और,
मैं, मैं हूँ।
जग मुझे स्वीकारे,
या ना स्वीकारे,
इससे मेरा 'मैं' नहीं बदलने वाला।
प्रकृति के नियमों से मैं जन्मा,
प्रकृति की गोद में पला,
और प्रकृति से ही सभी बदलाव मुझमें घटे,
मुझमें से 'मैं' चले जाने के बाद भी,
यदि तुम मुझे न जलाओ,
तो भी मुझे कोई फर्क नहीं,
क्योंकि मेरे पीछे छूटे उस 'मैं' को समेटना प्रकृति जानती है,
बिना किसी सहायता के, बिना किसी स्वार्थ के,
बिना किसी योगदान के, बिना किसी शिकायत के,
वो मेरे 'मैं' को समेट लेगी।
और फिर मेरे 'मैं' को
किसी के रूप से न जोड़ना,
किसी अनुरूप से न जोड़ना,
किसी के अंश से न जोड़ना,
किसी की प्रतिभा से न जोड़ना,
ना किसी के जैसा, ना कोई और,
मैं केवल, मैं हूँ।
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एक घंटा पहले

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