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शायद... ज़िंदगी का यही सच है,

                
                                                         
                            हर रोज़
                                                                 
                            
हर रोज़ कुछ न कुछ छूट ही जाता है।

मुश्किल घड़ी में झूठा रिश्ता टूट ही जाता है।
हर कोई अपनी सच्चाई छुपाता है,

और न चाहते हुए भी कई रिश्ते निभाता है।
शायद... ज़िंदगी का यही सच है,

हर चेहरा मुस्कुराता तो है, मगर हर दिल अपनी एक कहानी छुपाता है।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 महीने पहले

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