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अडिग नाव भीलों की

                
                                                         
                            अकबर समकालीन भारत का मानो नक्शा हो,
                                                                 
                            
विशाल साम्राज्य समुद्र सा, लहरें उफान पर।

उस महासागर में तैरती एक नन्ही नाव,
मेवाड़ की—राणा प्रताप का छोटा सा राज्य।

न दिखा कभी झुकता, न डूबा कभी लहरों में,
समुद्र-रूपी तूफानों से न कभी भयभीत हुआ।

क्योंकि नाव में बैठे थे वे आदिवासी वीर,
जो लहरों से लड़ने को ही जन्मे थे सदा!

न झुके कभी आगे विशाल साम्राज्य के सम्मुख,
अडिग रहे वे, अटल रहे वे—स्वाभिमान के धनी।

मेवाड़ की नाव आज भी गाती है गान अमर,
'डरना नहीं, लड़ना है—ये हमारा संकल्प है!'
-कन्हैया लाल मीणा
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5 महीने पहले

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