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सब कुछ है

                
                                                         
                            अमीरी है, गरीबी है, भूख है, फ़कीरी है
                                                                 
                            
ज़िंदा है, मुर्दा है, शरीर है, शरीरी है

बेचैनी है, घबराहट है, ख़ामोशी है, झंझट है
प्रकट है, विकट है, तमाशा है, संकट है

मंत्र है, तंत्र है, देखा है, यंत्र है
गिरना है, उठना है, बेवजह षड्यंत्र है

जन्म है, मृत्यु है, आना है, जाना है
अद्भुत है, आश्चर्य है, देखा है, अनजाना है

स्वार्थ है, परमार्थ है, यादें हैं, फरियादें हैं
गाते हैं, बजाते हैं, सुनते और सुनाते हैं

कौन है, किसका है, कब है, क्यूँ है
क्या पता दर्द है, दवा है या कि दुआ है

थोड़ा है, बहुत है, कुछ है, सब कुछ है
सुख है, दु:ख है, इर्द-गिर्द ही सब कुछ है।

- कामिनी मोहन।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
44 मिनट पहले

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