यदि मिले मुझे वरदान इच्छामृत्यु का
तो मैं समय की गति में पीछे जा कर
उस क्षण जब तुम्हारी गोद में मेरा सर था
सर पर तुम्हारा हाथ था
मैं क्षण को कुछ क्षणों के लिए रोक दूंगा
फिर एक लंबी गहरी सांस लेकर
एक आखिरी बार तुम्हारी आँखों में देख कर
ईश्वर से कहूंगा
बस इसी क्षण यही क्षण मेरी आखिरी क्षण हो
और ईश्वर कहे 'तथास्तु'
- कमल यशवंत सिन्हा 'तिलस्मानी'
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